इस गाइड में: टैक्स कैसे बचाएं (tax kaise bachaye), new tax regime me tax kaise bachaye, income tax kaise bachaye — सभी सवालों के जवाब Hindi और English दोनों में।
हर साल टैक्स भरते समय यही सवाल आता है — टैक्स कैसे कम करें? अच्छी ख़बर यह है कि सरकार ने नए नियमों में बड़ी राहत दी है। अब नई टैक्स रिजीम में ₹12 लाख तक की कमाई पर ज़ीरो टैक्स हो सकता है। इस लेख में आसान भाषा में समझेंगे — कौन-सी रिजीम चुनें, कैसे टैक्स बचाएँ, और क्या-क्या छूट मिलती है।
नई टैक्स रिजीम में अब ₹12 लाख तक की टैक्सेबल इनकम पर टैक्स ज़ीरो है (सेक्शन 87A (renumbered as Section 157 under the Income Tax Act, 2025) रिबेट के कारण)। और नौकरीपेशा लोगों को ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन अलग से मिलता है — यानी लगभग ₹12.75 लाख तक की सैलरी टैक्स-फ़्री हो सकती है।
भारत में अब दो टैक्स सिस्टम हैं, और आप हर साल इनमें से एक चुन सकते हैं:
कौन-सी बेहतर है, यह आपकी छूट (deductions) पर निर्भर करता है — नीचे समझाया है।
| टैक्सेबल इनकम | टैक्स दर |
|---|---|
| ₹0 – ₹4 लाख | 0% |
| ₹4 – ₹8 लाख | 5% |
| ₹8 – ₹12 लाख | 10% |
| ₹12 – ₹16 लाख | 15% |
| ₹16 – ₹20 लाख | 20% |
| ₹20 – ₹24 लाख | 25% |
| ₹24 लाख से ऊपर | 30% |
नोट: ₹12 लाख तक टैक्स स्लैब से बनता ज़रूर है, पर सेक्शन 87A रिबेट (₹60,000 तक) के कारण असल में टैक्स ज़ीरो हो जाता है। इसके ऊपर टैक्स सामान्य स्लैब से लगता है। हर टैक्स पर 4% सेस अलग से।
ओल्ड रिजीम में स्लैब पुराने हैं (₹2.5 लाख तक छूट, फिर 5%, 20%, 30%), पर इसमें कई डिडक्शन मिलते हैं। यह उनके लिए बेहतर है जिनके पास बहुत सारी छूट हों — जैसे होम लोन, ज़्यादा 80C निवेश, HRA। ओल्ड रिजीम में ₹5 लाख तक की टैक्सेबल इनकम पर 87A रिबेट (₹12,500) से टैक्स ज़ीरो रहता है।
सबसे लोकप्रिय छूट। इसमें आते हैं — PPF, EPF, ELSS म्यूचुअल फंड, जीवन बीमा प्रीमियम, बच्चों की ट्यूशन फ़ीस, होम लोन का प्रिंसिपल, 5-साल की टैक्स-सेविंग FD। कुल मिलाकर ₹1.5 लाख तक की छूट।
अपने और परिवार के हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर ₹25,000 तक (माता-पिता सीनियर सिटिज़न हों तो अतिरिक्त ₹50,000 तक) की छूट।
घर के लोन के ब्याज पर ₹2 लाख तक की छूट (खुद रहने वाले घर के लिए)।
अगर आप किराए के घर में रहते हैं और सैलरी में HRA मिलता है, तो नियम के अनुसार छूट मिल सकती है।
नेशनल पेंशन सिस्टम में निवेश पर 80C के ऊपर अतिरिक्त ₹50,000 तक की छूट।
आसान नियम: अगर आपकी छूट (80C + 80D + होम लोन + HRA) मिलाकर कम है, तो न्यू रिजीम बेहतर है (कम दरें, ₹12 लाख तक ज़ीरो टैक्स)। अगर आपके पास होम लोन और भारी निवेश हैं, तो ओल्ड रिजीम फ़ायदेमंद हो सकती है। दोनों में टैक्स जोड़कर तुलना करें — कैलकुलेटर से यह आसान है।
हाँ, FY 2025-26 में नई रिजीम के तहत ₹12 लाख तक की टैक्सेबल इनकम पर सेक्शन 87A रिबेट से टैक्स ज़ीरो हो जाता है। नौकरीपेशा को ₹75,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन अलग से मिलता है, यानी लगभग ₹12.75 लाख सैलरी तक टैक्स-फ़्री।
न्यू रिजीम में दरें कम पर छूट नहीं मिलतीं। ओल्ड रिजीम में दरें ज़्यादा पर 80C, 80D, HRA, होम लोन जैसी कई छूट मिलती हैं। जिसके पास ज़्यादा छूट हैं उसके लिए ओल्ड, बाक़ी के लिए न्यू अक्सर बेहतर।
PPF, EPF, ELSS, जीवन बीमा, बच्चों की ट्यूशन फ़ीस, होम लोन प्रिंसिपल, टैक्स-सेविंग FD — कुल ₹1.5 लाख तक की छूट। यह सिर्फ़ ओल्ड रिजीम में मिलती है।
नौकरीपेशा लोग आम तौर पर हर साल ITR भरते समय रिजीम चुन सकते हैं। बिज़नेस इनकम वालों के लिए नियम थोड़े अलग हैं।
कुल टैक्स पर 4% हेल्थ एंड एजुकेशन सेस लगता है, जो दोनों रिजीम में लागू होता है।
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, टैक्स सलाह नहीं। टैक्स नियम हर बजट में बदल सकते हैं; ऊपर दी जानकारी FY 2025-26 (AY 2026-27) पर आधारित है। अपनी स्थिति के अनुसार किसी योग्य टैक्स सलाहकार या CA से सलाह लें।
Official sources: आयकर विभाग